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ए.आर. रहमान - सुरों का सफर और चुनौतियाँ

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KIRTI

Jan 15, 2026 38
ए.आर. रहमान - सुरों का सफर और चुनौतियाँ

 ए.आर. रहमान ने 1991 में मणि रत्नम की फिल्म 'रोजा' से अपना सफर शुरू किया, लेकिन उन्हें बॉलीवुड में घर जैसा महसूस करने में सात साल का समय लगा। 'रोजा', 'बॉम्बे' और 'दिल से..' जैसी हिट फिल्मों के बाद भी वे खुद को एक बाहरी व्यक्ति (outsider) मानते थे।

ए.आर. रहमान (स्वगत): शुरुआती दिनों में मुझे हिंदी बोलनी नहीं आती थी, और एक तमिल व्यक्ति के लिए हिंदी बोलना मुश्किल होता है क्योंकि हमें अपनी भाषा से बहुत लगाव होता है। शुरुआत में मेरी फिल्मों के तमिल गानों का हिंदी में शाब्दिक अनुवाद किया जाता था, जो काफी अपमानजनक लगता था क्योंकि लोग कहते थे कि हिंदी बोल खराब हैं। इसी वजह से मैंने डब की गई फिल्मों के बजाय पूरी तरह से हिंदी फिल्मों पर ध्यान देना शुरू किया।

 फिल्म 'ताल' के निर्माण के दौरान

सुभाष घई: रहमान, मुझे तुम्हारा संगीत बहुत पसंद है, लेकिन अगर तुम यहाँ लंबे समय तक टिकना चाहते हो, तो तुम्हें हिंदी सीखनी होगी

ए.आर. रहमान: मैंने आपकी बात मानी। मैंने उर्दू सीखी क्योंकि यह 1960 और 70 के दशक के हिंदी संगीत की जननी है। इसके बाद मैंने अरबी भी सीखी क्योंकि इसका उच्चारण उर्दू के समान है।

सूत्रधार: 1999 की फिल्म 'ताल' रहमान के करियर का वह मोड़ थी जिसने उन्हें उत्तर भारत के हर घर में पहचान दिलाई। सुखविंदर सिंह के साथ उनके जुड़ाव ने संगीत में पंजाबी प्रभाव को जन्म दिया, जिससे 'छैया छैया' और 'जय हो' जैसे प्रतिष्ठित गाने बने।

 वर्तमान समय - एक साक्षात्कार

साक्षात्कारकर्ता: रहमान सर, पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड में आपके काम को लेकर काफी चर्चा रही है। क्या आपको भेदभाव महसूस होता है?

ए.आर. रहमान: मैंने पिछले आठ वर्षों में हिंदी फिल्म उद्योग में काम खोया है। शायद सत्ता अब उन लोगों के हाथ में है जो रचनात्मक (creative) नहीं हैं। मुझे अक्सर 'चाइनीज व्हिसपर्स' के जरिए पता चलता है कि संगीत कंपनियों ने मुझे बुक करने के बाद अपनी पसंद के अन्य संगीतकारों को रख लिया।

ए.आर. रहमान : 

यह शायद सांप्रदायिक भी हो सकता है, लेकिन यह मेरे सामने सीधे तौर पर नहीं आता। मैं काम की तलाश में नहीं जाता; मैं चाहता हूँ कि मेरी ईमानदारी से काम मेरे पास आए, और जो मैं हकदार हूँ वो मुझे मिले

अतिरिक्त जानकारी (स्रोत के बाहर से): ए.आर. रहमान को वैश्विक स्तर पर उनके संगीत के लिए जाना जाता है और उन्होंने भारतीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया है। हालांकि, फिल्म उद्योग की आंतरिक राजनीति और बदलती पसंद उनके करियर के हालिया दौर को प्रभावित कर रही है, जैसा कि उन्होंने स्वयं स्वीकार किया है।

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