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कांग्रेस में पीढ़ीगत बदलाव – दिग्विजय सिंह का राज्यसभा से हटने का फैसला

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SAURABH TRIPATHI

Jan 14, 2026 • 44 Views

कांग्रेस में पीढ़ीगत बदलाव – दिग्विजय सिंह का राज्यसभा से हटने का फैसला

 कांग्रेस में पीढ़ीगत बदलाव – दिग्विजय सिंह का राज्यसभा से हटने का फैसला

मध्य प्रदेश की राजनीति और कांग्रेस के भीतर एक बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने घोषणा की है कि वे राज्यसभा का अगला कार्यकाल नहीं मांगेंगे,। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश में युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।

 पार्टी के भीतर से ही बदलाव की मांग उठने लगी थी। अनुसूचित जाति (SC) विंग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने सिंह से अपील की थी कि इस बार राज्यसभा में दलित वर्ग का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए,। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने स्पष्ट किया कि वे अपनी सीट खाली कर रहे हैं, हालांकि अंतिम निर्णय उनके हाथ में नहीं है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला राहुल गांधी के "संगठन सृजन" (Sangathan Srijan) पहल का हिस्सा है। इस रणनीति के तहत, अनुभवी नेताओं को जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने के लिए तैनात किया जा रहा है, जबकि युवाओं के लिए जिम्मेदारी और दृश्यता के नए रास्ते खोले जा रहे हैं,।

(भविष्य की भूमिका और चुनौतियाँ): दिग्विजय सिंह की अगली भूमिका काफी महत्वपूर्ण होने वाली है। उन्हें कांग्रेस के जमीनी नेटवर्क को फिर से जीवित करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की जिम्मेदारी दी जा सकती है,। संभावना है कि वे चुनाव से पहले एक और "नर्मदा परिक्रमा" करेंगे,। 2017-18 में उनकी 3,300 किलोमीटर की यात्रा ने 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

हालांकि, उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस इस समय कई मुश्किलों से जूझ रही है, जैसे:

  • कमजोर बूथ कमेटियां और संगठनात्मक रिक्तता।
  • पार्टी के भीतर गुटीय मतभेद।
  • 2020 में हुए दलबदल के कारण कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ा बुरा असर।

(समापन): सिंह अक्सर अपनी विचारधारा और आरएसएस (RSS) के साथ वैचारिक टकराव के लिए चर्चा में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने भाजपा और आरएसएस की संगठनात्मक ताकत की प्रशंसा कर विवाद खड़ा कर दिया था, हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उनके सबसे बड़े आलोचकों में से एक हैं। अब देखना यह होगा कि राज्यसभा छोड़ने के बाद, सिंह संगठन को कितनी मजबूती दे पाते हैं।

 

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