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इसरो की वापसी - PSLV-C62 मिशन

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SAURABH TRIPATHI

Jan 07, 2026 • 46 Views

इसरो की वापसी - PSLV-C62 मिशन

भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने भरोसेमंद PSLV रॉकेट के साथ एक बार फिर अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है। 12 जनवरी 2026 को सुबह 10:17 बजे, श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्चपैड से PSLV-C62 का प्रक्षेपण किया जाएगा। यह साल 2026 में इसरो का पहला मिशन होगा।

यह मिशन इसरो के लिए एक महत्वपूर्ण वापसी है, क्योंकि मई 2025 में PSLV-C61 एक दुर्लभ विफलता का शिकार हो गया था। उस समय, रॉकेट के तीसरे चरण (third stage) में आई तकनीकी खराबी के कारण मिशन बीच में ही विफल हो गया और EOS-09 रडार इमेजिंग सैटेलाइट नष्ट हो गया था। इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन के अनुसार, तीसरे चरण के मोटर केस के चेंबर प्रेशर (chamber pressure) में अचानक गिरावट देखी गई थी। PSLV के 32 वर्षों के गौरवशाली इतिहास में यह केवल तीसरी बड़ी विफलता थी।

इस आगामी मिशन, PSLV-C62, का मुख्य उद्देश्य EOS-N1 उपग्रह को कक्षा में स्थापित करना है, जिसे 'अन्वेषा' (Anvesha) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ-इमेजिंग सैटेलाइट है जिसे DRDO द्वारा विकसित किया गया है। अन्वेषा के साथ-साथ, भारत और विदेशों के कई अन्य छोटे उपग्रह और प्रयोग भी अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे।

हालांकि, इस मिशन के बीच पारदर्शिता को लेकर भी कुछ चिंताएं जताई जा रही हैं। मई 2025 की विफलता की विफलता विश्लेषण समिति (FAC) की रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी सरकारों और निजी फर्मों के उपग्रह लॉन्च करने वाले संगठन के रूप में, विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसी रिपोर्टों का सार्वजनिक होना बेहद जरूरी है। यह देरी इसरो की पारंपरिक कार्यशैली और उसकी 'पारदर्शिता की संस्कृति' से हटकर देखी जा रही है।

अंतरिक्ष की इस चुनौतीपूर्ण यात्रा में इसरो की यह वापसी एक अनुभवी खिलाड़ी की तरह है, जो एक छोटी सी गिरावट के बाद अपनी कमियों को सुधार कर पूरी ताकत के साथ फिर से मैदान में उतर रहा है।

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