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सोमवार के व्रत की महिमा और पूजा

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NEELU TRIPATHI

Jan 05, 2026 • 44 Views

सोमवार के व्रत की महिमा और पूजा

पटकथा: विश्वास की शक्ति और १६ सोमवार का व्रत

पात्र:

  1. सूत्रधार (Narrator)
  2. पूजा: एक धार्मिक प्रवृत्ति की छोटी बच्ची
  3. पूजा के पिता: एक बेरोजगार व्यक्ति
  4. साधु: एक मार्गदर्शक
  5. डॉक्टर और अन्य ग्रामीण

 गरीबी और हताशा

सूत्रधार: धर्म ही वह एकमात्र तत्व है जो हमारे साथ जाता है। सोमवार का व्रत केवल लड़कियों के लिए ही नहीं, बल्कि पुरुषों और लड़कों के लिए भी है, ताकि जीवन की आने वाली विघ्न-बाधाएँ समाप्त हो सकें।

पूजा (दुखी होकर): पिताजी, घर में खाने को रोटी नहीं है और माँ की बीमारी बढ़ती जा रही है। क्या भगवान सच में हैं? हम तो कभी किसी का बुरा नहीं करते, फिर सारी विपत्तियाँ हमारे ही घर क्यों हैं?

साधु का आगमन और समाधान

साधु: बिटिया, परेशान मत हो। तू शिव जी के १६ सोमवार का व्रत कर। भगवान भोलेनाथ तेरे घर की सारी समस्याएँ खुद संभाल लेंगे। बस याद रखना, भगवान केवल अपने भक्तों की परीक्षा लेते हैं। परीक्षा के समय तेरा विश्वास डगमगाना नहीं चाहिए

पूजा: मैं संकल्प लेती हूँ बाबा, मैं यह व्रत पूरी निष्ठा से करूँगी।

विश्वास का पहला चमत्कार

सूत्रधार: व्रत शुरू होने से पहले ही पूजा के मन में 'नमः शिवाय' का जाप जागृत हो गया। उसे महसूस हुआ कि कोई उसके साथ खड़ा है।

(अगले ही दिन पिता के मित्र का प्रवेश)

पिता के मित्र: भाई, घर बैठे क्या करते हो? मेरे पास आकर काम क्यों नहीं कर लेते?

पूजा (प्रसन्न होकर): महादेव! आपने इतनी जल्दी सुन ली? कल ही पहला सोमवार था और आज पिताजी को काम मिल गया।

 परीक्षा की घड़ी

अक्सर लोग सुख आते ही भक्ति कम कर देते हैं, लेकिन पूजा के जीवन में एक और बड़ी परीक्षा आई। दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोई

ग्रामीण (पूजा का मजाक उड़ाते हुए): अरे, शिव जी पर जल चढ़ाने से तेरी माँ नहीं बचेगी! जा जाकर इलाज करवा, भक्ति से कुछ नहीं होता।

पूजा (रोते हुए महादेव से): बाबा, संसार कहता है कि भक्ति बेकार है, पर मैं इस संसार की नहीं सुनूँगी। मैं केवल आपकी हूँ।

महादेव की कृपा और उपसंहार

डॉक्टर: बेटी, परेशान मत हो। एक सामाजिक संस्था (NGO) तुम्हारी माँ के इलाज का सारा खर्च उठाने को तैयार है। तुम्हारी माँ अब बिल्कुल ठीक है।

पूजा: यह मेरे महादेव और १६ सोमवार के व्रत की ही कृपा है।

प्रमुख अंतर्दृष्टि (Key Insights from Sources):

  • अटूट विश्वास: हमारी भक्ति का फल इसलिए कम हो जाता है क्योंकि हमारे भीतर थोड़ा अविश्वास होता है। भक्ति में १००% विश्वास होना अनिवार्य है।
  • सुख में सुमिरन: व्यक्ति को सुख के समय इतने अच्छे कार्य और धर्म करना चाहिए कि बड़े कष्ट अपने आप समाप्त हो जाएँ।
  • सच्चा भक्त: वही है जो परीक्षा के समय भागे नहीं और जिसका विश्वास कभी कम न हो।

निष्कर्ष के तौर पर एक छोटी सी तुलना:

 जैसे एक मजबूत नींव वाले घर को तूफान भी नहीं गिरा सकता, वैसे ही जिस भक्त का विश्वास (Faith) गहरा होता है, उसे जीवन की बड़ी से बड़ी विपत्तियाँ भी विचलित नहीं कर पातीं। पूजा का विश्वास ही उसकी वह नींव थी जिसने चमत्कार को संभव बनाया।

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