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उत्सव और परंपरा पोंगल 2026

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NEELU TRIPATHI

Jan 11, 2026 • 48 Views

उत्सव और परंपरा  पोंगल 2026

आज हम भारत के सबसे जीवंत फसल उत्सवों में से एक, पोंगल 2026 के बारे में विस्तार से जानेंगे। यह त्योहार मुख्य रूप से तमिलनाडु के लोगों द्वारा मनाया जाता है और यह सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक माध्यम है।

मुख्य तिथियाँ (Dates and Time): साल 2026 में, मुख्य पर्व थाई पोंगल और मकर संक्रांति दोनों बुधवार, 14 जनवरी को मनाए जाएंगे। डिक पंचांग के अनुसार, थाई पोंगल संक्रांति का सटीक समय दोपहर 03:13 बजे होगा।

चार दिनों का उत्सव: यह उत्सव चार दिनों तक चलता है, जिसमें प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व है:

  1. भोगी पोंगल (13 जनवरी, मंगलवार): इस दिन लोग पुरानी चीजों को त्याग कर और उन्हें जलाकर नई शुरुआत का स्वागत करते हैं।
  2. थाई पोंगल / सूर्य पोंगल (14 जनवरी, बुधवार): यह मुख्य दिन है। इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है और नए चावल पकाए जाते हैं।
  3. माट्टू पोंगल (15 जनवरी, गुरुवार): यह दिन कृषि में कड़ी मेहनत करने वाले मवेशियों (गायों और बैलों) को सजाने और उनकी पूजा करने के लिए समर्पित है।
  4. कानुम पोंगल (16 जनवरी, शुक्रवार): त्यौहार के अंतिम दिन लोग अपने रिश्तेदारों से मिलते हैं, पारिवारिक पुनर्मिलन करते हैं और सैर-सपाटे पर जाते हैं।

पौराणिक कथा और महत्व (History and Significance): पोंगल शब्द का अर्थ है "उबलना"। इस दिन दूध और गुड़ में चावल पकाकर 'पोंगल' नामक पारंपरिक मीठा व्यंजन बनाया जाता है। इस व्यंजन का इतिहास चोल राजवंश से जुड़ा है और इसके व्यंजनों का उल्लेख प्राचीन मंदिरों के शिलालेखों में भी मिलता है।

इसके पीछे एक दिलचस्प कथा भगवान शिव के बैल, बसवा की है। कहा जाता है कि बसवा की एक गलती के कारण भगवान शिव ने उसे पृथ्वी पर जाकर मनुष्यों की खेती में मदद करने के लिए भेज दिया था। यही कारण है कि पोंगल पर किसान सूर्य, वर्षा और उन जानवरों का सम्मान करते हैं जो खेती में सहायक होते हैं।

उत्सव के रंग: इस उत्सव के दौरान घरों के बाहर चावल के आटे से बनी सुंदर कोलम (Kolam) कलाकृतियाँ बनाई जाती हैं और लोग नए कपड़े पहनकर खुशियाँ मनाते हैं।

उपसंहार (Conclusion): पोंगल प्रकृति और मनुष्य के बीच के सुंदर संबंध का प्रतीक है। उम्मीद है कि यह जानकारी आपके लिए उपयोगी रही होगी। आप सभी को पोंगल 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ!

 

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