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बैंक कर्मियों का हल्ला बोल: 5-डे वर्किंग की मांग और देशव्यापी हड़ताल का ऐलान

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SAURABH TRIPATHI

Jan 05, 2026 • 46 Views

बैंक कर्मियों का हल्ला बोल: 5-डे वर्किंग की मांग और देशव्यापी हड़ताल का ऐलान

लखनऊ में आज बैंक कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है,। हजरतगंज स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के प्रांगण में भारी संख्या में जुटे कर्मचारियों ने न केवल नारेबाजी की, बल्कि 27 जनवरी को देश भर में बैंक हड़ताल करने का भी बड़ा ऐलान कर दिया है,। आइए देखते हैं हमारे संवाददाता की यह विशेष रिपोर्ट।

लखनऊ के व्यस्ततम इलाके हजरतगंज में आज माहौल काफी गरम है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारी यहाँ अपनी मांगों को लेकर एकत्र हुए हैं। इनकी मुख्य मांग है—बैंकों में 5 दिवसीय कार्य प्रणाली (5-day working) लागू करना।

"हम लंबे समय से सप्ताह में 5 दिन काम की मांग कर रहे हैं, लेकिन हमारी सुनवाई नहीं हो रही है। बैंककर्मियों पर तनाव और काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। जब आर.बी.आई. (RBI), एल.आई.सी. (LIC) और जनरल इंश्योरेंस में 5 दिवसीय कार्य प्रणाली लागू है, तो बैंकों में क्यों नहीं? अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो हम लंबे संघर्ष के लिए तैयार हैं"।

 प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई आज की नहीं है। 7 सालों से यह मांग अधूरी पड़ी है।

अजय पाण्डेय प्रदर्शन के बीच बात करते हुए

 "हमारी यह डिमांड पिछले 7 सालों से है। सरकार ने लिखित समझौता किया था कि इसे लागू किया जाएगा, लेकिन वादा पूरा नहीं हुआ। इसीलिए अब हमने निर्णय लिया है कि 27 जनवरी को पूरे देश में बैंक हड़ताल की जाएगी",।

 कर्मचारियों का यह भी तर्क है कि आज के डिजिटल युग में 6 दिन काम करने का कोई औचित्य नहीं है।

 प्रदर्शनकारियों के नारों और पोस्टरों का क्लोज-अप

प्रदर्शनकारी आज डिजिटल पेमेंट की सुविधा है, लोगों को बैंक आने की कम जरूरत पड़ती है। 6 दिन काम करवाकर हम पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, जिससे हमारा वर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़ गया है। हमें हफ्ते में 2 दिन की राहत चाहिए ताकि हम परिवार को समय दे सकें और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकें।

इस ऑल इंडिया हड़ताल में देश के सभी बैंक शामिल होने जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार 27 जनवरी से पहले इन कर्मचारियों की मांगों पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।

 यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि बैंक हड़ताल की तिथियाँ और सरकारी वार्ताएँ समय के साथ बदल सकती हैं। किसी भी वित्तीय लेनदेन की योजना बनाने से पहले कृपया आधिकारिक बैंक सूचनाओं या नवीनतम समाचारों की पुष्टि अवश्य कर लें।

समझने के लिए एक छोटा सा उदाहरण:

 बैंक कर्मियों की यह स्थिति वैसी ही है जैसे किसी धावक से बिना रुके दौड़ने की उम्मीद की जाए, जबकि आधुनिक तकनीकों (जैसे डिजिटल बैंकिंग) ने दौड़ के ट्रैक को अब काफी छोटा और सुगम बना दिया है। वह धावक अब केवल थोड़ा समय सुस्ताने और फिर से ऊर्जा प्राप्त करने की मांग कर रहा है।

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