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चीन की 'ग्रेट डिजिटल वॉल' और डिजिटल कोल्ड वॉर

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SAURABH TRIPATHI

Jan 18, 2026 • 30 Views

चीन की 'ग्रेट डिजिटल वॉल' और डिजिटल कोल्ड वॉर

 इतिहास अक्सर खुद को दोहराता है, लेकिन उसका स्वरूप बदल जाता है। 20वीं शताब्दी में 'बर्लिन वॉल' ने दुनिया को दो हिस्सों में बाँटा था, और आज 2026 में बीजिंग एक ऐसी दीवार खड़ी कर रहा है जिसे आप देख तो नहीं सकते, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया महसूस करेगी। इसे 'द ग्रेट डिजिटल वॉल ऑफ चाइना' कहा जा रहा है। चीन ने रातों-रात अमेरिका और इजराइल की दिग्गज साइबर सिक्योरिटी कंपनियों को अपने सिस्टम से हटाना शुरू कर दिया है।

 मुख्य खबर और प्रतिबंध (The Ban):

 बीजिंग ने अपने सरकारी विभागों, बैंकों और टेलीकॉम टावरों को एक गोपनीय निर्देश (Confidential Directive) जारी किया है। इसके तहत CrowdStrike, Palo Alto Networks और इजराइल की Check Point जैसी कंपनियों के लिए चीन के दरवाजे अब लगभग बंद हो चुके हैं। यह केवल एक कॉस्मेटिक बदलाव नहीं है, बल्कि चीन अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था की 'डीप क्लींजिंग' कर रहा है।

 चीन ऐसा क्यों कर रहा है? (The Logic):

 चीन का तर्क सीधा है: 'डेटा ही अब राष्ट्रीय सुरक्षा है'। बीजिंग को डर है कि विदेशी सॉफ्टवेयर में 'बैक डोर्स' हो सकते हैं, जिनका इस्तेमाल CIA या मोसाद जैसी एजेंसियाँ निगरानी के लिए कर सकती हैं। यहाँ एक महत्वपूर्ण कांसेप्ट आता है—'वेपनाइजेशन ऑफ इंटरडिपेंडेंस'। चीन को डर है कि किसी भू-राजनीतिक संघर्ष की स्थिति में, अमेरिका एक स्विच दबाकर चीन के पावर ग्रिड और बैंकों को ठप कर सकता है। इसीलिए, चीन चाहता है कि 'किल स्विच' का कंट्रोल केवल उसके पास हो।

 पैरेलल डिजिटल यूनिवर्स और स्पिलनेट (The Parallel Universe) होस्ट: 

चीन केवल प्रतिबंध नहीं लगा रहा, बल्कि एक समांतर डिजिटल ब्रह्मांड (Parallel Digital Universe) खड़ा कर चुका है। उसके पास 5G के लिए Huawei, डेटा स्टोरेज के लिए Alibaba Cloud और खुद के सेमीकंडक्टर हैं। इसे 'डिजिटल बाल्कनाइजेशन' या 'स्पिलनेट' (Splinternet) कहा जा रहा है, जहाँ इंटरनेट अब वैश्विक नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय सीमाओं में कैद हो गया है।

 डिजिटल कोल्ड वॉर के तीन स्तंभ (The Three Pillars) होस्ट: 

यह नया डिजिटल शीत युद्ध तीन चीजों पर टिका है:

  1. डेटा: जिसे 21वीं सदी का नया तेल (New Oil) माना जाता है।
  2. एल्गोरिदम: जो तय करते हैं कि आप क्या सोचेंगे और कैसे रिएक्ट करेंगे।
  3. इंफ्रास्ट्रक्चर: जैसे 5G, अंडर-सी केबल्स और डेटा सेंटर्स। दुनिया अब बाइपोलर डिजिटल ऑर्डर की तरफ बढ़ रही है—एक तरफ ओपन अमेरिकन मॉडल है और दूसरी तरफ स्टेट-कंट्रोल्ड चाइनीज मॉडल।

भारत के लिए चुनौती (Challenge for India) होस्ट:

 भारत के लिए यह एक सामरिक दुविधा (Strategic Dilemma) है। जहाँ हम 'आत्मनिर्भर भारत' और डेटा लोकलाइजेशन की बात करते हैं, वहीं सवाल यह है कि क्या हम हमेशा विदेशी टूल्स पर निर्भर रह सकते हैं? भारत को अपनी डिजिटल संप्रभुता (Digital Sovereignty) की रक्षा भी करनी है और ग्लोबल इनोवेशन का हिस्सा भी बने रहना है। इसके लिए हमें एक संतुलित मध्यम मार्ग (Balanced Middle Path) अपनाना होगा।

चीन की दीवार ग्रेट वॉल ऑफ चाइना :

चीन की दीवार, जिसे ग्रेट वॉल ऑफ चाइना कहा जाता है, दुनिया की सबसे प्रसिद्ध और विशाल ऐतिहासिक संरचनाओं में से एक है। इसका निर्माण मुख्य रूप से चीन को बाहरी आक्रमणों से बचाने के लिए किया गया था।

प्रमुख तथ्य

इसका निर्माण 7वीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर मिंग वंश (14वीं–17वीं शताब्दी) तक अलग-अलग कालों में हुआ।

इसकी कुल लंबाई लगभग 21,000 किलोमीटर मानी जाती है।

यह पत्थर, ईंट, मिट्टी और लकड़ी से बनाई गई है।

दीवार में निगरानी टावर, किले और चौकियां भी शामिल हैं।

महत्व

यह चीन की सैन्य रणनीति और इंजीनियरिंग कौशल का प्रतीक है।

1987 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।

आज यह चीन की पहचान और एक प्रमुख पर्यटन स्थल है।

चीन की दीवार न केवल एक रक्षा संरचना थी, बल्कि यह चीन के इतिहास, संस्कृति और शक्ति का भी प्रतीक मानी जाती है।

 निष्कर्ष (Conclusion): 

संदेश साफ है—तकनीकी आत्मनिर्भरता अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। इंटरनेट जो कभी दूरियाँ मिटाने के लिए बना था, अब सीमाओं को मजबूत करने का जरिया बन रहा है। आपकी इस बारे में क्या राय है? क्या आप एक विभाजित इंटरनेट वाली दुनिया के लिए तैयार हैं? कमेंट में जरूर बताएँ।

अतिरिक्त जानकारी: स्रोतों के अनुसार, यह डिजिटल विभाजन वर्ष 2026 से पूर्ण रूप से प्रभावी होने की दिशा में बढ़ रहा है।

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