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1457 में, फ्रांस के साविग्नी (Savigny) गाँव में एक सूअर (sow) और उसके छह बच्चों पर एक बच्चे की हत्या का मुकदमा चलाया गया था

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NEELU TRIPATHI

Jan 13, 2026 • 29 Views

1457 में, फ्रांस के साविग्नी (Savigny) गाँव में एक सूअर (sow) और उसके छह बच्चों पर एक बच्चे की हत्या का मुकदमा चलाया गया था

 मध्यकालीन फ्रांस के 'अपराधी' सूअर

 प्रस्तावना: आज के समय में यह सोचना भी अजीब लगता है कि किसी जानवर को अदालत में ले जाया जाए। लेकिन मध्यकालीन यूरोप, विशेषकर फ्रांस में, यह एक सामान्य वास्तविकता थी। 1457 में, फ्रांस के साविग्नी (Savigny) गाँव में एक सूअर (sow) और उसके छह बच्चों पर एक बच्चे की हत्या का मुकदमा चलाया गया था

 सूअर और उनका खतरा : उस समय के सूअर आज के गुलाबी और शांत दिखने वाले जानवरों जैसे नहीं थे। वे जंगली सूअरों (wild boars) के अधिक करीब थे—तेज़, शक्तिशाली और सर्वभक्षी। चूँकि वे खुले घूमते थे, वे छोटे बच्चों के लिए बहुत खतरनाक साबित होते थे。 इतिहास में ऐसे सैकड़ों रिकॉर्ड हैं जहाँ सूअरों ने बच्चों को मार डाला या खा लिया।

 कानूनी प्रक्रिया: ये मामले केवल गुस्से की प्रतिक्रिया नहीं थे, बल्कि गंभीर कानूनी कार्यवाही थे। रिकॉर्ड बताते हैं कि इन जानवरों को बाकायदा जेल में रखा जाता था, उन्हें ठेले (cart) में अदालत ले जाया जाता था और उनके लिए पेरिस से जल्लाद बुलाए जाते थे。

  • उदाहरण: 1457 के मामले में, सूअर को दोषी पाया गया और फांसी दी गई, लेकिन उसके बच्चों को खून से सने होने के बावजूद बरी कर दिया गया।
  • एक अन्य मामला: 1379 में, एक मठ (abbey) के सूअरों पर हत्या का आरोप लगा, लेकिन ड्यूक फिलिप द बोल्ड ने उन्हें माफी दे दी क्योंकि वे "अच्छे व्यवहार वाले" माने गए।

 मुकदमों का उद्देश्य: ये मुकदमे क्यों होते थे? इतिहासकारों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण थे:

  1. व्यवस्था की बहाली: मध्यकालीन लोगों के लिए, एक जानवर द्वारा इंसान को मारना प्राकृतिक व्यवस्था (natural order) का उल्लंघन था। मुकदमा और फांसी इस टूटी हुई व्यवस्था को सुधारने का एक तरीका था。
  2. स्पष्टता और जांच: अदालतें यह भी पता लगाती थीं कि क्या मालिक या माता-पिता की लापरवाही थी।
  3. शक्ति का प्रदर्शन: फांसी देने का अधिकार होना स्थानीय शासकों के लिए अपनी ताकत दिखाने का एक माध्यम था।

 निष्कर्ष: हालाँकि हमें यह अजीब लग सकता है, लेकिन उस समय के लोगों के लिए यह न्याय करने का एक तार्किक तरीका था।

उपसंहार (Analogy): इसे समझने के लिए एक टूटी हुई मशीन का उदाहरण लें। यदि कोई मशीन किसी को चोट पहुँचाती है, तो हम उसे ठीक करने या नष्ट करने की कोशिश करते हैं ताकि व्यवस्था बनी रहे। मध्यकालीन समाज के लिए, यह कानूनी प्रक्रिया उस समय की सामाजिक मशीनरी को ठीक करने जैसा ही था।

नोट: इस प्रतिक्रिया में दी गई सभी ऐतिहासिक घटनाएँ और तथ्य आपके द्वारा प्रदान किए गए 'सूत्रों' (sources) पर आधारित हैं। संवाद और स्क्रिप्ट का स्वरूप जानकारी को प्रस्तुत करने का एक रचनात्मक तरीका है।

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