Menu
Select Language
EN
HI

भारत ने अमेरिका से आयात होने वाले येलो पीस (पीली मटर), लेंटिल्स (मसूर) और चिक पीस (चने) पर 30% टैरिफ लगा दिया

S

SAURABH TRIPATHI

Jan 18, 2026 • 38 Views

भारत ने अमेरिका से आयात होने वाले येलो पीस (पीली मटर), लेंटिल्स (मसूर) और चिक पीस (चने) पर 30% टैरिफ लगा दिया

 क्या भारत ने ट्रंप के खिलाफ 'साइलेंट स्ट्राइक' की है?

 हाल ही में यह खबर चर्चा में है कि क्या भारत ने अमेरिका पर बहुत ही शांत तरीके से हमला किया है। यह हमला किसी हथियार से नहीं, बल्कि अमेरिकी दालों (pulses) पर लगाए गए भारी टैरिफ के माध्यम से किया गया है। डोनल्ड ट्रंप की 'टैरिफ नीति' के बीच भारत के इस कदम ने अमेरिकी राजनीति में हलचल मचा दी है।

(अमेरिकी सेनेटर्स की नाराजगी और ट्रंप को पत्र) अमेरिका के दो प्रमुख राज्यों, नॉर्थ डकोटा और मोंटाना, के सेनेटर्स ने राष्ट्रपति ट्रंप को एक पत्र लिखा है। ये दोनों राज्य अमेरिका में दालों के सबसे बड़े उत्पादक हैं। सेनेटर्स का कहना है कि भारत द्वारा लगाया गया टैरिफ 'अनुचित और अत्यधिक' (unfair and excessive) है, जिससे अमेरिकी दालें भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने ट्रंप से मांग की है कि भारत के साथ चल रही ट्रेड डील वार्ताओं में इस मुद्दे को प्रमुखता से रखा जाए।

(भारत ने टैरिफ क्यों लगाया?) भारत ने अमेरिका से आयात होने वाले येलो पीस (पीली मटर), लेंटिल्स (मसूर) और चिक पीस (चने) पर 30% टैरिफ लगा दिया है। इसके पीछे भारत के मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:

  • किसानों का संरक्षण:
  •  यदि यह टैरिफ नहीं लगाया जाता, तो विदेशी दालें भारतीय बाजार में बहुत सस्ते दामों पर आ जातीं, जिससे स्थानीय दालों की कीमतें गिर जातीं और भारतीय किसानों को भारी नुकसान होता।
  • खाद्य सुरक्षा: 
  • भारत में लगभग 130 मिलियन किसान दालों के उत्पादन पर निर्भर हैं और यह भारत की शाकाहारी आबादी के लिए प्रोटीन का मुख्य स्रोत है।
  • आत्मनिर्भरता: 
  • भारत सरकार विदेशी दालों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहती है। भारत दालों का दुनिया में सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता दोनों है, लेकिन भारी खपत के कारण उसे आयात भी करना पड़ता है।

भारत में दालों का उत्पादन (India Pulse Production) – हिंदी में पूरी जानकारी

भारत को “दालों का घर” कहा जाता है, क्योंकि भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और आयातक है। दालें भारतीय भोजन का अहम हिस्सा हैं और प्रोटीन का मुख्य शाकाहारी स्रोत मानी जाती हैं।

भारत में प्रमुख दालें

भारत में मुख्य रूप से निम्न दालों का उत्पादन होता है:

चना (Chickpea)

अरहर / तूर (Pigeon Pea)

मूंग (Green Gram)

उड़द (Black Gram)

उत्पादन आँकड़े (लगभग)

भारत का वार्षिक दाल उत्पादन: 25–27 मिलियन टन

विश्व उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी: 25% से अधिक

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर प्रभाव:

 भारत के इस कदम के कारण अमेरिका में दालों का सरप्लस स्टॉक जमा हो गया है, जिससे वहां की घरेलू कीमतें गिर गई हैं और अमेरिकी किसान काफी नाखुश हैं। अमेरिकी सेनेटर्स का तर्क है कि भारत को दालों की जरूरत है और अमेरिका के पास अतिरिक्त उत्पादन है, इसलिए बाजार खुलना चाहिए।

ट्रेड डील और भविष्य की राह : भारत और अमेरिका के बीच कृषि का मुद्दा हमेशा से सबसे कठिन रहा है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि कृषि उसके लिए एक 'रेड लाइन' है और वह अपना कृषि बाजार पूरी तरह से विदेशी कंपनियों के लिए नहीं खोलेगा।

दूसरी ओर, ट्रंप टैरिफ को एक रणनीतिक हथियार (weapon) की तरह इस्तेमाल करते हैं और अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति पर अडिग हैं। हालांकि भारत कुछ रियायतें या कोटा सिस्टम पर विचार कर सकता है, लेकिन वह अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए आपातकालीन उपाय करने का अधिकार अपने पास रखना चाहेगा।

निष्कर्ष: 

यह विवाद केवल दालों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत-यूएस रणनीतिक साझेदारी की सीमाओं को भी दर्शाता है। क्या दालों का यह मुद्दा भारत और अमेरिका के बीच होने वाली बड़ी ट्रेड डील को प्रभावित करेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

Discussion