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"वंदे मातरम: 150 वर्षों का गौरवशाली सफर"

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kirti

Jan 26, 2026 • 22 Views

"वंदे मातरम: 150 वर्षों का गौरवशाली सफर"

 "वंदे मातरम: 150 वर्षों का गौरवशाली सफर"

(कर्तव्य पथ, नई दिल्ली - गणतंत्र दिवस परेड)

आज भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस वर्ष का समारोह अत्यंत विशेष है क्योंकि यह हमारे राष्ट्रीय गीत, 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ के विषय (theme) पर आधारित है। कर्तव्य पथ पर दिखाई देने वाला उत्साह इस कालातीत मंत्र के प्रति हमारे सम्मान को दर्शाता है, जिसने भारत की चेतना में स्वतंत्रता की भावना को जगाया था।

( ऐतिहासिक पृष्ठभूमि - 1870 का दशक)

'वंदे मातरम' की रचना 1870 के दशक में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा संस्कृतमयी बंगाली में की गई थी। 1882 में, इसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित किया गया, जो 'संन्यासी विद्रोह' की घटनाओं पर आधारित था।

 यह गीत केवल कविता नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। अंततः, 1950 में इसे भारतीय गणराज्य के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया।

(आधुनिक समय और सांस्कृतिक प्रभाव)

इस गीत की विरासत को नई पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए समय-समय पर इसके विभिन्न संस्करण सामने आए हैं। 1997 में, प्रसिद्ध संगीतकार ए. आर. रहमान ने अपनी एल्बम 'वंदे मातरम' जारी की थी।

इस एल्बम को भारत की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर जारी किया गया था। इसने न केवल युवाओं में देशभक्ति का संचार किया, बल्कि राष्ट्रीय एकता की भावना को भी सुदृढ़ किया।

 

 आज, 150 वर्षों के बाद भी, 'वंदे मातरम' का क्रांतिकारी स्वरूप हमारे नागरिकों, विशेषकर युवाओं और छात्रों को राष्ट्र से जोड़ने का काम कर रहा है। यह गीत हमारे दिलों में हमेशा जीवित रहेगा।

 

"गणतंत्र दिवस भारत में एक राष्ट्रीय अवकाश है, जो भारतीय संविधान को अपनाने और देश के गणराज्य (Republic) में परिवर्तन की स्मृति में मनाया जाता है, जो 26 जनवरी 1950 को प्रभावी हुआ था|

 

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, भारत के राष्ट्रपति विभिन्न नागरिक पद्म पुरस्कार वितरित करते हैं। इनकी स्थापना वर्ष 1954 में की गई थी और इन्हें वरीयता के घटते क्रम में तीन श्रेणियों में प्रदान किया जाता है:

• पद्म विभूषण: "असाधारण और विशिष्ट सेवा" के लिए दिया जाता है और यह दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।

• पद्म भूषण: "उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा" के लिए दिया जाता है और यह तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।

• पद्म श्री: "विशिष्ट सेवा" के लिए दिया जाता है और यह चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।

इस अलंकरण में एक प्रमाण पत्र और एक पदक शामिल होता है। अन्य राष्ट्रीय सम्मानों के विपरीत, इन पुरस्कारों में नकद भत्ता, लाभ या विशेष रियायतें शामिल नहीं होती हैं। अलंकरण समारोह के दिन प्रत्येक पुरस्कार विजेता के संबंध में संक्षिप्त विवरण देने वाली एक स्मारक पुस्तिका (brochure) भी जारी की जाती है।

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77वां गणतंत्र दिवस (2026): स्रोतों में बताया गया है कि भारत का 77वां गणतंत्र दिवस विशेष रूप से 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ की थीम पर आधारित था,। यह उत्सव कर्तव्य पथ पर बहुत उत्साह के साथ मनाया गया, जिसका उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर युवाओं को इस गीत की क्रांतिकारी भावना से जोड़ना था。

राष्ट्रीय गौरव: जिस प्रकार पद्म पुरस्कार विशिष्ट सेवा का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार गणतंत्र दिवस समारोह 'वंदे मातरम' जैसे प्रतीकों का सम्मान करते हैं, जिन्होंने भारत की चेतना में स्वतंत्रता की भावना को जगाया। उदाहरण के लिए, 1997 में ए. आर. रहमान के 'वंदे मातरम' एल्बम ने स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ पर देश में देशभक्ति और एकता की भावना भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

यह उत्सव सुनिश्चित करता है कि भारत की विरासत और इसके योगदानकर्ताओं का सम्मान आने वाली पीढ़ियों के दिलों में बना रहे

 

जय हिंद!

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