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भारतीय सेना के 'इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स' (IBGs) - युद्ध की नई रणनीति

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SAURABH TRIPATHI

Jan 12, 2026 • 5 Views

भारतीय सेना के 'इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स' (IBGs) - युद्ध की नई रणनीति

भारतीय सेना के 'इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स' (IBGs) - युद्ध की नई रणनीति: भारतीय सेना अपनी युद्ध क्षमता को और अधिक आधुनिक, फुर्तीला और घातक बनाने के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर बढ़ रही है। पूर्वी क्षेत्र में सेना की ताकत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए 'इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स' यानी IBGs बनाने की योजना अब ज़ोर पकड़ रही है,।

 युद्धक्षेत्र और सेना की हलचल : ये IBGs आत्मनिर्भर और ब्रिगेड के आकार की बेहद चुस्त लड़ाकू इकाइयाँ होंगी। इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रत्येक IBG का नेतृत्व मेजर जनरल रैंक के एक अधिकारी करेंगे और इसमें 5,000 से अधिक सैनिक शामिल होंगे,। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन ग्रुप्स में कोई अलग 'ब्रिगेड कमांडर' नहीं होगा,।

 पानागढ़ और XVII माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स (MSC) : इस योजना का आगाज़ पानागढ़ स्थित XVII माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स से होने की संभावना है, जो चीन की सीमा पर भारत की पहली रक्षा पंक्ति है। चर्चा है कि इस कॉर्प्स की दो डिवीजनों—59 और 23 डिवीजन—से चार IBGs बनाए जाएंगे।

 IBG की आंतरिक संरचना (Graphics/Infographics) : एक IBG अपनी ज़रूरत का हर सामान और ताकत खुद साथ लेकर चलेगी। इसमें इन्फैंट्री बटालियन, तोपखाना (artillery) रेजिमेंट, कोर ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (EME), कॉम्बैट इंजीनियर्स और यहाँ तक कि फील्ड अस्पताल भी शामिल होंगे। ज़रूरत पड़ने पर ये इकाइयाँ कॉर्प्स मुख्यालय से अतिरिक्त रसद और सहायता भी ले सकेंगी।

 रणनीतिक महत्व और तेज़ तैनाती : पहाड़ी इलाकों में युद्ध की स्थिति में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। जहाँ एक पूरी कॉर्प्स (जिसमें एक लाख तक सैनिक हो सकते हैं) को तैनात करने में लंबा समय लगता है, वहीं ये छोटे और फुर्तीले IBGs दुश्मन के हमले का तुरंत जवाब देने या खुद हमला करने में सक्षम होंगे। इनका गठन पूर्व सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत द्वारा प्रस्तावित सेना के बड़े पुनर्गठन का हिस्सा है।

 वैश्विक प्रतिस्पर्धा (Global Context) : यह बदलाव केवल भारत तक सीमित नहीं है। पिछले दशक में चीन ने भी अपनी पुरानी डिवीजनों को बदलकर छोटे और अधिक बहुमुखी 'कम्बाइंड आर्म्स ब्रिगेड' (CABs) में तब्दील कर दिया है, जो टैंक, तोपखाने और वायु रक्षा इकाइयों से लैस हैं।

निष्कर्ष:  इन ग्रुप्स के बनने से न केवल सेना के विभिन्न अंगों में बेहतर तालमेल (cohesiveness) आएगा, बल्कि भविष्य के 'थिएटर कमांड' के तहत इन्हें और भी प्रभावी ढंग से तैनात किया जा सकेगा।

इसे समझने के लिए एक सरल उदाहरण: एक IBG एक 'स्विस आर्मी नाइफ' (Swiss Army Knife) की तरह है—यह इतना छोटा और हल्का है कि इसे तुरंत कहीं भी ले जाया जा सकता है, लेकिन इसमें हर वह ज़रूरी औज़ार मौजूद है जिसकी ज़रूरत युद्ध के मैदान में पड़ सकती है। यह एक भारी और विशाल टूलबॉक्स के विपरीत है जिसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में बहुत समय और मेहनत लगती है।

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